खुश्बु

मैं साया नहीं जो छोड के चला जाऊँगा,
मैं हवा का झोंका नहीं जो आके लौट जाऊँगा,
मैं तो खुश्बु हूँ तेरे बदन की, तेरी चिता के साथ ही जल जाऊँगा ।।

-निसर्ग

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बात बन जाती है…

किसीकी याद रह जाती है, किसीकी चाहत मिल जाति है…

जिन्दगि की राह मे कई वादियाँ गुज़र जाती है…

हर वादी में खुदको नया पाता हूँ ,

बेगाने अपने हो जाते है और बात बन जाती है…

– निसर्ग

तरस …!!!

हम तो करते है बारिश का इंतज़ार,

क्योंकि इसी बहाने कोई देता है हमको पुकार,

अरे ओ बारिश अब तो जम के बरस,

हमें भी लगती है यार के आवाज़ की तरस !!!!

– निसर्ग

इम्तिहान

कैसे कहूँ की मुझे कुछ कहना है,

दिल में दबी आवाज को आप तक पहुचाना  है,

ज़हेन में मची बेकरारी को मिटाना है,

अभी तो ऐसे कई इम्तिहानो से गुजरना है..!!

– निसर्ग

हुस्न…!!!

जुल्फ घनहरी वादी में, पूरी रात मैं सोता रहू,

बाहोंमें सिमटे लिपटे हुए, प्यार तुम्ही से करता रहू,

हल्की हल्की साँसों की बढती हुई रफ्तारोमें ,

होशमें ना आऊ आज, हुस्नकी नदीमें पिघलता रहू ।।

– निसर्ग