सुखी ज़मीन…

रास्तोकी दूरियां रिश्तोंकी नज़दीकियां बन गई,
यादोंकी कश्तियाँ तन्हाइयो का ज़ेवर बन गई,
सिरहानेकी गर्मी में आपकी साँसों को ढूंढ़ता हुँ,
ठंडी और गर्मी तो गुज़र गई,
सीनेमें छिपी बारिश की बौछार के लिए सुखी ज़मीन ढूंढ़ता हुँ ॥

-निसर्ग