तरस …!!!

हम तो करते है बारिश का इंतज़ार,

क्योंकि इसी बहाने कोई देता है हमको पुकार,

अरे ओ बारिश अब तो जम के बरस,

हमें भी लगती है यार के आवाज़ की तरस !!!!

– निसर्ग