इम्तिहान

कैसे कहूँ की मुझे कुछ कहना है,

दिल में दबी आवाज को आप तक पहुचाना  है,

ज़हेन में मची बेकरारी को मिटाना है,

अभी तो ऐसे कई इम्तिहानो से गुजरना है..!!

– निसर्ग

हुस्न…!!!

जुल्फ घनहरी वादी में, पूरी रात मैं सोता रहू,

बाहोंमें सिमटे लिपटे हुए, प्यार तुम्ही से करता रहू,

हल्की हल्की साँसों की बढती हुई रफ्तारोमें ,

होशमें ना आऊ आज, हुस्नकी नदीमें पिघलता रहू ।।

– निसर्ग

इशारे

मेरी साँसों की रफ्तारे,

धडकनों की बढती बेचेनिया,

सीने में उठती ये हसीं सिसकिया,

सब इशारे है बस तुझी को पाना ।।

– निसर्ग