कसूर

कसूर तेरा था न मेरा था,

और नहीं की हमारी बिच की दूरी का था,

कसूर तो हमारी सिद्दत-ए-मुलाकात में था,

जो हर बार हमारे बिच में आया था ||

– निसर्ग

लैला – मजनू

कानो में बाली थी और गालो पे लाली थी,
न जाने कौनसी वो मनहूस घडी थी,
जब मजनू ने लैला पे नजर डाली थी,
तकदीर तो देखो उसकी..
लोगोने पत्थर मार मार के उसकी जान निकाली थी ||
– निसर्ग