छोड़ आये हम वो दुनिया

छोड़ आये हम वो दुनिया , छोड़ आये हम वो दुनिया ||

यारो की महफ़िलो में देर रात हुआ करती थी ,

सुबह उठे बिस्त्तर से तो धुप दिखा करती थी,

पापा की डांट सुन सुन के फिर रात हुआ करती थी,

छोड़ आये हम वो दुनिया , छोड़ आये हम वो दुनिया ||

मम्मी की रोटी खाके पेट भरा करता था,

देखा है उस चूल्हे पे इंतज़ार रहा करता है,

छोड़ आये हम वो दुनिया ||

पैसा ही इबादत है, हर चीज़ के जरुरत है,

एक अँधा कुआ है या, एक बंध गली सी है,

एक छोटा सा किस्सा है जो भूल नहीं पाता,

में लाख बुलाता हूँ वो फिर से नहीं आता, वो फिर से नहीं आता;

छोड़ आये हम वो दुनिया , छोड़ आये हम वो दुनिया ||

– निसर्ग

Advertisements