कसूर

कसूर

कसूर तेरा था न मेरा था,

और नहीं की हमारी बिच की दूरी का था,

कसूर तो हमारी सिद्दत-ए-मुलाकात में था,

जो हर बार हमारे बिच में आया था ||

- निसर्ग